जप जप रे नवकार मंत्र | Jap Jap Re Navakar Mantr

जप जप रे नवकार मंत्र

जप जप रे नवकार मंत्र तू , इस भव पर भव सुख पासी,
इस भव पर भव सुख पासी ।।
अरिहंत सिद्ध आचार्य सुमरले, उपाध्याय साधु चित धर ले,
जन्म मरण थारो मिट जासी,
जन्म मरण थारो मिट जासी ।।जप जप रे…।।

सीता सती ने इसको ध्याया, अग्नि का था नीर बनाया,
धन्य धन्य कहे जगवासी ,
धन्य धन्य कहे जगवासी ।।जप जप रे…।।

सेठ पुत्र का जहर हटा था, श्रीपाल का कुष्ठ मिटा था,
टली सुदर्शन की फ़ांसी ,
टली सुदर्शन की फ़ांसी ।।जप जप रे…।।

महिमा इसकी कही ना जाय, पंकज जो नर इसको ध्याये,
वो भवसागर तिर जासी ,
वो भवसागर तिर जासी ।।जप जप रे…।।


स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ २१४