जय जिनवाणी माँ, जय जिनवाणी माँ | jaya jinavani ma n jaya jinavani ma n

जय जिनवाणी माँ, जय जिनवाणी माँ,

मैं पाऊँ बोधि-समाधि रे ।। टेक ।।

पुण्योदय जिनशासन पाया, आनंद हुआ अपार रे।
सारभूत शुद्धातम भासा, सब संसार असार रे।। 1।।

महापुरुषों का आराधन लख, रोम-रोम हुलसाया।
सहज ज्ञान-वैराग्यमयी जीवन हो, यही सुहाया।। 2 ।।

भेदज्ञान कर तत्त्व भावना से रागादि निवारूँ।
जासो बंध नवीन न होवे, पूरव कर्म विडारूँ ।। 3 ।।.

अक्षय प्रभुता निज की पाई, निज में तृप्त रहाऊँ।
यही भाव धरि सहज नमन करि, जाननहार रहाऊँ ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १५५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’