छांड दे अभिमान जियरा छांड दे अभिमानरे
(राग ख्याल तमाशा व गजल)
छांड दे अभिमान जियरा छांड दे अभिमानरे ॥टेर ॥
कहाँ को तू और कौन तेरे सब ही हैं महमान रे।
देख राजा रंक कोऊ थिर नहीं या थानरे ॥१॥
जगत देखत तोर चलबो तूभी देखत आनरे ।
घड़ी पल की खबर नाहीं कहाँ होय विहानरे ॥२॥
त्याग क्रोधरु लोभ माया, मोह मदिरा पान रे।
राग दोष हि टार अन्तर, दूरकर अज्ञान रे ॥३॥
भयो सुर पुर देव कबहू कबहू नरक निदानरे ।
इक कर्म वश बहु नाच नाचे भइया आप पिछानरे ॥४ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १८ (विभिन्न कवियों के भजन)