झूलना मैं झुलाता हूँ तुमको प्रभु, मेट दो मेरे भव-भव का तुम झूलना | Jhoolna Mai Jhulata Hu Tumko Prabhu, Met Do Mere Bhav-Bhav Ka Tum Jhoolna

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झूलना मैं झुलाता हूँ तुमको प्रभु,
मेट दो मेरे भव-भव का तुम झूलना।

झूलना, झूलना अब नहीं झूलना,
जो अनादी से झूला है वो झूलना। ।।1।।

मोह ममता की पलकी में बैठा फिरा,
कभी ऊपर चढ़ा कभी नीचे गिरा।
घूमा चारों गति में मेरा झूलना। ।।2।।

कभी सुरगति में झूला तो फूला बहुत,
खाये त्रियंच के मैंने हूळा बहुत।
हाय नरकों का झूला नहीं झूलना। ।।3।।

कभी शुभ योग से बन गया जो मैं नर,
मन हुआ है विषय में इधर से उधर।
फिर न सोचा कि पहुँचे कहाँ झूलना। ।।4।।

रचयिता : अज्ञात
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस

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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।

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