जय-जय चन्द्र जिनेश, दर्शन मंगलकारी रे | jaya jaya chandra jinesha darshana mamgalakari re

तर्जः प्रभु हम सबका एक…

जय-जय चन्द्र जिनेश, दर्शन मंगलकारी रे।

जय-जय चन्द्र जिनेश, दर्शन आनन्दकारी रे।। टेक ।।

देवों के भी देव जिनेश्वर, वीतराग सर्वज्ञ महेश्वर ।
तुम्हें निरखते थकित न होवे, दृष्टि हमारी रे।। 1।।

अक्षय सुख का तन्त्र बताया, भेदज्ञान का मन्त्र सिखाया।
अन्तर्मुख होते ही विनशे, विपदा सारी रे।। 2।।

तुमको पाकर चाह मिटी है, झूठी पर की आस मिटी है।
निज में ही देखी अपनी, प्रभुता अविकारी रे।। 3।।

प्रभुवर निज में ही रम जावें, पाने योग्य स्वयं में पायें।
आवागमन नशाय, भावना यही हमारी रे।। 4।।

देखी हमने दुनियाँ सारी, नहीं दिखे तुम सा उपकारी।
जिन चरणों में अहो ! समर्पित भक्ति हमारी रे।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ९४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’