जिनमंदिर में, आओ रे आओ | jinamamdira mem ao re ao

जिनमंदिर में, आओ रे आओ।

प्रभुवर के गुण, गाओ रे गाओ ।।

बोलो जय-जयकार रे।। टेक।।

देखो प्रभु को, देखो स्वयं को,
देखो प्रभु सम, आज स्वयं को।
केवल जाननहार रे।। 1।।

व्यर्थ भटकते फिरे जगत् में,
अपना सर्वस्व है अपने में।
जिनवर दर्शावनहार रे।। 2।।

पाप गठरिया व्यर्थ न बाँधो,
भेदज्ञान कर शिवपद साधो ।
पाओ सुख अविकार रे।। 3।।

वीतराग प्रभु कर्त्ता नाहीं,
फिर भी भवि जावें शिव माँही।
महिमा अपरम्पार रे।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’