(तर्ज - देखा जबसे आत्मा)
जाना मैंने ज्ञान से, मैं ज्ञान का बना,
अन्य कोई द्रव्य मुझमें, आना है मना।
वीतरागता है देखलो स्वभाव में,
अतीत, वर्तमान और भविष्य तक रहे,
जाना मैंने ज्ञान से…
१. जब से पाया मैंने मानुष नाम,
धन्य हुआ देखो मेरा आतम राम।
पाया है अमूल्य रत्न ज्ञान से भरा,
जिससे आज तक सदा वंचित ही था रहा,
जाना मैंने ज्ञान से…
२. भेद विज्ञान में निमित्त है बड़ा,
सब ज्ञेयों को जाने केवलि कहा।
देखले तू भव्य तेरा ज्ञान है महान्,
सर्व कर्म नष्ट करे, दूर हो अज्ञान,
जाना मैंने ज्ञान से…
Artist: Shashwat Shruti Jain , Shastri
Lyrics: Shashwat Shruti Jain Shastri