चलि सखि देखन नाभिरायघर, नाचत हरि नटवा
चलि सखि देखन नाभिरायघर, नाचत हरि नटवा ।
अद्भुत ताल मान शुभलययुत, चवत राग षटवा ।।चलि.।।
मनिमय नूपुरादिभूषन-दुति, युत सुरंग पटवा ।
हरिकर नखन नखनपै सुरतिय, पगफेरत कटवा ।।१।।चलि. ।।
किन्नर करधर बीन बजावत, लावत लय झटवा ।
‘दौलत’ ताहि लखैं चख तृपते, सूझत शिववटवा ।।२।।चलि. ।।
Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ७५