चेतन भोरों पर तैं उरझ रह्यो रे
(राग भैरवी)
चेतन भोरों पर तैं उरझ रह्यो रे,
छक मद मोह में अयानो भयो डोलै - भोरों पर तैं उरझ रह्योरे ॥ टेर ॥
भव सुख सारे तैने निहारे, थिर ना रहेंगे, प्रगट बिछुरेंगे ।
तदपि इनही में लिपट रह्योरे ॥ १ ॥
भ्रम बुद्धिधारी तैने निहारी, अतुल गुणधारी, सुगुन हितकारी,
‘थान’ इन ही में निवस रह्योरे ॥ २ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३० (विभिन्न कवियों के भजन)