जरा सी सम्पदा पाकर, अरे ! मदहोश मत होना | jara si sampada pakara are madahosha mata hona

तर्ज : हमें संस्कार सिखलाती…

जरा सी सम्पदा पाकर, अरे ! मदहोश मत होना।

कि तेरी जिंदगी कितनी, पाप के बीज मत बोना ।। टेक ।।

है लक्ष्मी चंचला चपला, नहीं टिकती कहीं इक जा।
ढलती फिरती है छाया, बड़ी कुल्टा है ये माया।।
सदा चक्कर लगाती है कि तुम विश्वास मत करना ।। 1 ।।

ये जीवन एक तमाशा है, और पानी का पताशा है।
करे सामान सदियों का, न पूरी होती आशा है।।
काल सिर पर खड़ा तेरे कि अवसर व्यर्थ मत खोना ।। 2 ।।

घड़ा है माँस मिट्टी का, तथा पेशाब टट्टी का।
है चिकना चाम से लिपटा, है तन तेरा बड़ा गंदा।।
सरासर बेबफा है ये कि तुम आसक्त मत होना।। 3 ।।

दान देकर सफल कर धन, लगे उपकार में जीवन।
तपस्या से गला दे तन, करो निज आत्म का चिन्तन।।
इसी से आत्मन् ! तेरा, सदा कल्याण है होना।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३७९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’