जो जीवन हो तो ऐसा हो
जो जीवन हो तो ऐसा हो,
ज्ञान-वैराग्यमय सुखमय, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।
सहज स्वाधीन प्रभुतामय, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।।टेक।।
अकिंचन ब्रह्म लोकोत्तम, अकर्ता प्रभु सहज जाना ।
अहो! निष्काम आनंदमय, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।।1।।
तृप्त निज में सहज कृतकृत्य, अहो! निर्द्वन्द निर्दण्ड ।
निराकुल शांत समतामय, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।।2।।
नहीं कुछ कर्म का बंधन, प्रकट अविनाशी वैभवमय ।
स्वानुभवमय सहज निरपेक्ष, जीवन हो तो ऐसा हो ।।3।।
नहीं करना नहीं मरना, न कुछ लेना न कुछ देना ।
स्वयं सिद्ध पूर्ण निज में ही, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।।4।।
दृष्टि नासा अचल आसन, विगत दूषण रहित भूषण ।
दिगम्बर सौम्य जिन मुद्रा, जो जीवन हो तो ऐसा हो ।।5।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ ११७ से ११८