जिनमुद्रा हमको लागे प्यारी | jinamudra hamako lage pyari

तर्जः जैन मंदिर हमको…

जिनमुद्रा हमको लागे प्यारी ।। टेक ।।

आयुध-अम्बर रहित दिगम्बर, परम सौम्य जग हितकारी ।
आसन अचल, दृष्टि नासा पै, अन्तर्मुख है अविकारी ।। 1 ।।

शोभ रही है अद्भुत प्रभुता, जावें भविजन बलिहारी।
स्वानुभूति की निमित्तभूत है, भवाताप नाशनहारी ।। 2 ।।

तुम साक्षी में हे परमेश्वर, निज निधि पायी सुखकारी।
भाव यही निज में रम जाऊँ, नमूँ चरण मंगलकारी ।। 3 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ६२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’