तर्ज : जय जय मोदी जी थारी
जय कुन्द कुन्द जी थाँकी, जय कुन्द कुन्द जी थाँकी !
पथ सूँ भूल्या जीवाँ ने राह बता दी रे - थाने राह बता दी रे,
परमागम नूँ रचकर के मुक्ति दिखा दी रे ।
हो क्रियाकांड, पाखण्ड ऊपर रोक लगा दी रे - ऊपर रोक लगा दी रे ।
समयसार नूँ सार खोल, गुरुदेव बता दी रे - गुरुदेव बता दी रे,
वाह जी म्हारा गुरुदेव, काँई बात बता दी रे,
म्हूँ भी हूँ भगवान् आत्मा, लहर चला दी रे - लहर चला दी रे ।। टेक ।।
श्वेताम्बर गुरु के हाथाँ में जद, समयसार छो आयो,
समयसार नूँ पढ़कर गुरुने, मत दिगंबर अपनायो-मत दिगंबर अपनायो ।
दिगम्बर मत अपना गुरु ने, धूम मचा दी रे - गुरु ने धूम मचा दी रे,
वाह जी म्हारा गुरुदेव, काँई बात बता दी रे,
हो क्रियाकांड, पाखण्ड ऊपर रोक लगा दी रे-ऊपर रोक लगा दी रे ।।1।।
समयसार नूँ सार खोल … म्हूँ भी हूँ भगवान् आत्मा …
शुभाचार सूँ धर्म को सपणो, गुरु न छो तुड़वायो,
वीतराग विज्ञान धर्म नूँ, घर-घर मे पहुँचायो - घर-घर मे पहुँचायो ।
भारत भू पे भेद-ज्ञान की ज्योति जला दी रे - ज्योति जला दी रे,
वाह जी म्हारा गुरुदेव, काँई बात बता दी रे,
हो क्रियाकांड, पाखण्ड ऊपर रोक लगा दी रे-ऊपर रोक लगा दी रे।।2।।
समयसार नूँ सार खोल … म्हूँ भी हूँ भगवान् आत्मा …
तत्त्वज्ञान का शिविराँ नो, गुरु न बिगुल बजायो,
जिनमन्दिर बणवा गुरु जिन, शासनध्वज लहरायो-शासनध्वज लहरायो ।
जिनशासन सूँ निजशासन की, नवीं दिशा दी रे - नवीं दिशा दी रे,
हो क्रियाकांड, पाखण्ड ऊपर रोक लगा दी रे-ऊपर रोक लगा दी रे ।।३।।
वाह जी म्हारा गुरुदेव, काँई बात बता दी रे,
म्हूँ भी हूँ भगवान् आत्मा …
स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन