जागृति गीत | jagrriti gita

जागो-जागो रे जागो रे जागो आज,

उमर यूँ ही बीत रही।। टेक ।।

हित करने का ये समय, विषयों माँहि गँवाया।
मूरखता ये ना कर, फिर पीछे पछताय ।। 1।।

धन परिकर परिवार ये, कछु न आवे काम।
तन भी माटी में मिले, चेतो आतम राम।। 2।।

पुण्य भाव भी जो करे, आत्म ज्ञान बिन जीव।
पावे सुख किंचित् नहीं, भव में रुले सदीव ।। 3 ।।

जिनवर का उपदेश सुन, पहिचानो निज भाव।
मोह नाश शिवपद लहो, अन्य न कोई उपाय ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३९४ से ३९५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’