झण्डा जैन धरम का सब मिल लहराओ | jhanda jaina dharama ka saba mila laharao

तर्ज : चित्स्वरूप महावीर …

झण्डा जैन धरम का सब मिल लहराओ।

झण्डा जैन धरम का ऊँचा फहराओ ।। टेक।।

मंगल अवसर आया है, आनन्द-आनन्द छाया है।
आनन्द अपरम्पार, प्रभु को सिर नाओ ।। 1।।

ऋषभादिक चौबीस तीर्थंकर, धर्म बताया जगत् हिंतकर।
यही धर्म सुखकार, समझा-समझाओ।। 2।।

मोह भाव ही है दुःखकारी, रत्नत्रय ही मंगलकारी।
स्व-पर भेद-विज्ञान, भव्यजन प्रगटाओ।। 3।।

हिंसादिक दुर्भाव नशाओ, सम्यक् तत्त्वभावना भाओ।
परम अहिंसा धर्म, हर्ष से अपनाओ।। 4।।

धर्म भावना बढ़ती जावे, वैभाविक परिणति मिट जावे ।
धर्म महोत्सव सफल होय, प्रभु गुण गाओ।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३१५ से ३१६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’