जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा | Jiv Tu Anadihitain Bhulyau Shivagailava

जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा

जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा ।।टेक।।

मोहमदवार पियौ, स्वपद विसार दियौ, पर अपनाय लियौ,
इन्द्रिसुखमें रचियौ, भवतैं न भियौ, न तजियौ मनमैलवा ।।१।।जीव. ।।

मिथ्या ज्ञान आचरन धरिकर कुमरन, तीन लोककी धरन,
तामें कियो है फिरन, पायो न शरन, न लहायौ सुखशैलवा ।।२।।जीव. ।।

अब नरभव पायौ, सुथल सुकुल आयौ, जिन उपदेश भायौ,
‘दौल’ झट छिटकायौ, परपरनति दुखदायिनी चुरलैवा ।।३।।जीव. ।।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ १५६