जिनराज.... जिनराज | Jinaraj Jinaraj

जिनराज… जिनराज

लेकर आए हैं हमें अपने ही गाँव में-2
निज की छाँव में पधारे भगवान् ।।

जिनराज जिनराज…

सबसे है न्यारा, बड़ा प्यारा निजातम ।
जिनवर बतलाया जिनका निज में है शासन ।।
जिनवर ने, निज में ही जिनवर पाया ।
भगवन ने, निज में आतम दर्शाया ।।
उसको ही ध्यायें हम सब, झुक जाए पाँव में ।
लेकर आए हैं हमें अपने ही गाँव में ।।निज की…।।1 ।।

सुन्दर छवि है जैसे अमृत बरसता ।
अखियों में प्रभु की, निजातम झलकता ।
प्रभुवर ने, निज रत्नत्रय है पाया ।
जिनवर ने केवलज्ञान है प्रगटाया ।।
हम भी तुम सम बन जाए ऐसे हों भाव में
लेकर आए हैं हमें अपने ही गाँव में ।।निज की…।।2 ।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ६१ से ६२