जैन भजन संग्रह (अनुक्रमणिका सहित) — Jain Bhajan Sangrah, 2016

291 पृष्ठ का जैन भजन संग्रह (मई 2016) — देव, गुरु, शास्त्र, तीर्थ, वैराग्य आदि विषयों पर सैकड़ों भजन, विषयानुसार अनुक्रमणिका सहित। अनुक्रमणिका नीचे, पूरा संग्रह PDF में।
A 291-page collection of Jain bhajans (May 2016) arranged by theme with a full index. Index transcribed below; complete PDF attached.


जैन

  1. भजन

15th May 2016

Index

देव

  1. अशरीरी सिद्ध भगवान 25. छोटा सा मंदिर

  2. आ गया… आ गया… 26. जगदानंदन

  3. आओ जिनमंदिर में आओ 27. जब कोई नहीं आता मेरे बाबा

  4. आज मैं महावीर जी 28. जयवंतो जिनबिम्ब

  5. आज सी सुहानी 29. जिनवर आनन भान

  6. आज हम जिनराज 30. जिनवर दरबार तुम्हारा

  7. आया कहां से 31. झीनी झीनी उडे रे

  8. आया तेरे दरबार में 32. तिहारे ध्यान की मूरत

  9. आये तेरे द्वार 33. तुझे प्रभु वीर कहते हैं

  10. आयो आयो रे हमारो 34. तुम जैसा मैं भी

  11. एक तुम्हीं आधार हो 35. तुमसे लागी लगन

  12. ओ जगत के शांति दाता 36. तुम्हारे दर्श बिन स्वामी

  13. कभी वीर बनके 37. तुम्ही हो ज्ञाता

  14. कर लो जिनवर का गुणगान 38. तू ज्ञान का सागर है

  15. करता हूं तुम्हारा सुमिरन 39. तेरी शांत छवि

  16. करुणा सागर भगवान 40. तेरी शीतल शीतल मूरत

  17. केसरिया केसरिया 41. तेरी सुंदर मूरत

  18. कोई इत आओ जी 42. तेरे दर्शन से मेरा

  19. गा रे भैया 43. तोरी पल पल

  20. घडी घडी पल पल 44. दरबार तुम्हारा मनहर है

  21. चंद्रानन 45. दिन रात स्वामी तेरे गीत

  22. चरणों में आया हूं 46. देखो जी आदिश्वर स्वामी

  23. चवलेश्वर पारसनाथ 47. धन्य धन्य आज घडी

  24. चाह मुझे है दर्शन की 48. नाथ तुम्हारी पूजा

  25. नाम तुम्हारा तारणहारा

  26. निरखत जिन चंद्रवदन

  27. निरखी निरखी मनहर

  28. निरखो अंग अंग

  29. नेमि जिनेश्वर

  30. पंचपरम परमेष्ठी

  31. पद्मासद्म

  32. पारस प्यारा लागो

  33. पारस प्रभु का दर्शन

  34. प्रभु दर्शन कर जीवन की

  35. प्रभु हम सब का एक

  36. प्रभुजी अब ना भटकेंगे

  37. बाहुबली भगवान

  38. भटके हुए राही को

  39. भव भव रुले हैं

  40. भावना की चूनरी

  41. मन भाये चित्त हुलसाये

  42. मनहर तेरी मूरतियाँ

  43. महाराजा स्वामी

  44. महावीर स्वामी

  45. मिलता है सच्चा सुख केवल

  46. मेरे मन मंदिर में आन

  47. मेरे सर पर रख दो भगवन

  48. मैं तेरे ढिंग आया रे

  49. म्हारा आदीश्वर जी

  50. रंगमा रंगमा

  51. रोम रोम पुलकित हो जाये

  52. रोम रोम में नेमिकुंवर के

  53. रोम रोम से न

  54. वन्दों अद्भुत चन्द्रवीर जिन

  55. वर्तमान को वर्धमान की

  56. वर्धमान ललना से

  57. वीतरागी देव

  58. वीर प्रभु के ये बोल

  59. शुद्धात्मा का श्रद्धान

  60. शौरीपुर वाले

  61. श्री अरिहंत छवि लखिके

  62. श्री जिनवर पद ध्यावें जे नर

  63. सीमंधर स्वामी

  64. स्वामी तेरा मुखडा

  65. हम यही कामना करते हैं

  66. हरो पीर मेरी

  67. हे प्रभो चरणों में
    शास्त्र

  68. आज मैं परम पदारथ

  69. ओंकारमयी वाणी तेरी

  70. करता हूं मैं अभिनंदन

  71. चरणों में आ पडा हूं

  72. जब एक रत्न अनमोल

  73. जिनवाणी अमृत रसाल

  74. जिनवाणी की सुनै सो

  75. जिनवाणी जग मैया

  76. जिनवाणी माँ जिनवाणी माँ

  77. जिनवाणी माता दर्शन की

  78. जिनवाणी माता रत्नत्रय निधि

  79. जिनवैन सुनत, मोरी भूल भगी

  80. धन्य धन्य जिनवाणी माता शरण

  81. धन्य धन्य वीतराग वाणी

(पूरी पुस्तक का पाठ PDF में है; यहाँ केवल प्रारंभिक पृष्ठ / अनुक्रमणिका दी गई है। Full text is in the attached PDF; only the intro/index pages are transcribed here.)

डाउनलोड / Download PDF: Jain Bhajan.pdf