जिनवर के गुण गाओ-गाओ रे, प्रभुवर के गुण गाओ-गाओ रे | jinavara ke guna gao gao re prabhuvara ke guna gao gao re

जिनवर के गुण गाओ-गाओ रे, प्रभुवर के गुण गाओ-गाओ रे।

गाओ-गाओ, गाओ-गाओ, गाओ-गाओ रे ॥
आज खुशी का दिन आया है, गाओ-गाओ रे ॥ टेक ॥
मिला भाग्य से नर भव, मिल्यो श्रावक कुल जिनधर्म।
जिनवाणी से समझ लो, सहज तत्त्व का मर्म ॥ 1 ॥

नित्य निरंजन ज्ञानमय, निश्चय आतम राम।
सकल पाप तज आप भज, पाओ रे शिवधाम ॥ 2 ॥

वीतराग सर्वज्ञ जिन, गुण अनंत विलसाय ।
प्रभुवर की प्रभुता अमित, मोपे कही न जाय ॥ ३॥

ज्ञानमयी प्रभुता अहो! प्रत्यक्ष ज्ञान में देख।
मोह-महातम मिट गयो, आनंद भयो विशेष ॥ 4 ॥

देव-शास्त्र-गुरुवर-धर्म, नित वंदों धरि प्रीति।
करो स्वानुभव आत्मन् ! धारो तत्त्व प्रतीति ॥ 5॥


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २६७ से २६८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’