चेतन प्रभु के गुण गा ले, निज दर्शन निज में पा ले | chetana prabhu ke guna ga le nija darshana nija mem pa le

चेतन प्रभु के गुण गा ले, निज दर्शन निज में पा ले,

गुण गा ले, प्रभु गुण गा ले, चेतन प्रभु के ।

सारा दुख मिट जायेगा, भव बन्धन कट जायेगा।। टेक ।।

हिल-मिल कर जिनमंदिर आए आज, दर्शन पावें धन्य घड़ी धन्य भाग्य।
आनंद अपार प्रभु जय-जयकार, हम बार-बार करें नमस्कार।।
जो जिनवाणी सुन पायेगा, वह भेद-विज्ञान जगायेगा।। 1।।

देव-शास्त्र-गुरु का सच्चा श्रद्धान, फिर तत्त्वों का पाओ सम्यग्ज्ञान ।
पुनि कर विचार निज को निहार, मिथ्यात्व टार, सम्यक्त्व धार।।
जो यों पुरुषार्थ जगाएगा, वह शिव मारग लग जायेगा।। 2।
अखिल विश्व में आतम तत्त्व महान्, जिससे प्रगटे वीतराग-विज्ञान।
ये त्रलोक्यसार, आनंदकार, सब दुःखहार, हो नमस्कार ।।
जो निज में ही रम जायेगा, वह स्वयं सिद्धपद पायेगा।। 3।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३८८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’