चेतन! मान ले बात हमारी
चेतन! मान ले बात हमारी
पुद्गल जीव जीव पुद्गल नहिं, दोनों की विधि न्यारी॥चेतन.॥१॥
चहुँगतिरूप विभाव दशा है, मोखमाहिं अविकारी॥चेतन. ॥२॥
‘द्यानत’ दरवित सिद्ध विराजै, ‘सोहं’ जपि सुखकारी॥चेतन. ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २२
खोज: Chetan! Man Le Bat Hamari
अर्थ
अरे चेतन ! तू हमारी बात मान ले। यह पुद्गल जीव नहीं है और न जीव पुद्गल है। दोनों द्रव्य अलग अलग हैं, उनकी विधि, व्यवस्था, द्रव्य, सब अलग अलग हैं।
चारों गतियाँ जीव की वैभाविक दशा है, वैभाविक स्थिति है। केवल मोक्ष में ही जीव का शुद्ध रूप है, अविकारी रूप है अर्थात् मोक्ष ही एक ऐसा स्थान है जहाँ शुद्धता है, विकार नहीं है।
द्यानतराय कहते हैं कि जीवद्रव्य का जो सिद्धरूप है, निर्मलरूप है, वह ही मैं हूँ, उस रूप का जाप ही सुखकारी है।
स्रोत: द्यानत भजन सौरभ।
मूल पृष्ठ (छवि):
प्रूफरीडिंग बाकी है