चिदानन्द स्वामी, चिदानन्द स्वामी | chidananda svami chidananda svami

तर्ज : दिन रात स्वामी तेरे गीत गाऊँ …

चिदानन्द स्वामी, चिदानन्द स्वामी।

निजानन्द मण्डित, तुम ही हो अकामी ।। टेक ।।

तुम ही दृष्टा-ज्ञाता, तुम ही हो विधाता,
महा मोहतम को तुम ही हो नशाता।
तुम ही देव-जगदीश सर्वज्ञ नामी,
निजानंद मण्डित चिदानन्द स्वामी ।। 1।।

तुम ही ब्रह्मरूपी अलख हो अरूपी,
तुम ही तीर्थंकर सिद्ध विष्णु स्वरूपी ।
स्वयं में तुम ही हो महादेव नामी,
निजानन्द मण्डित चिदानन्द स्वामी।। 2।।

जो निज में रमता, वही तुमको पाता,
अनादि कर्म बंध को है नशाता।
शिवंकर हितंकर सुशंकर अकामी,
निजानन्द मण्डित चिदानन्द स्वामी ।। 3।।

घट-घट में व्यापी चिन्मूरति प्रतापी,
तुझे जो न जाने बना वो ही पापी।
अहो ! सच्चिदानन्द तुमको नमामी,
निजानन्द मण्डित चिदानन्द स्वामी।। 4।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ६३ से ६४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’