जिनवाणी साँची माँ, जिनवाणी साँची माँ | Jinavani Saci Ma Jinavani Saci Ma

तर्जः जयवंतो जिनवाणी…

जिनवाणी साँची माँ, जिनवाणी साँची माँ।

जयवन्तो जिनवाणी, जयवन्तो जिनवाणी ।। टेक।।

श्री सर्वज्ञ प्रभु की वाणी, गणधर गुरु उर माँहि समानी।
चुनि चुनि अंग रचे सुखखानी, द्वादशांगमय श्री जिनवाणी ।।। ।।
नित्यबोधिनी माँ जिनवाणी, स्व-पर विवेक कराती वाणी।
मिथ्या भ्रान्ति नशाती वाणी, ज्ञायक प्रभु दर्शाती वाणी।।2।।

असदाचरण नशाती वाणी, सत्य धर्म प्रगटाती वाणी।
भव दुःख हरण पीयूष समानी, भवदधि तारक नौका जानी । ।3 ।।
जो हित चाहो भवि जन प्राणी, पढ़ो सुनो ध्यावो जिनवाणी ।
स्वानुभूति से करो प्रमाणी, शिवपथ की है यही निशानी ।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ १७२ से १७३