जिनवर भक्ति सुखकारी | jinavara bhakti sukhakari

तर्जः जिनवर भक्ति मंगलकार…

जिनवर भक्ति सुखकारी,
प्रभु भक्ति मंगलकारी ।
जिनवर की भक्ति कर लो,
जिनवर की वाणी सुन लो ।।

तत्त्वों का निर्णय कर लो।। टेक।।

काया से न्यारा देखो,
कर्मों से न्यारा देखो ।
रागादिक भावों से भी,
न्यारा शुद्धातम देखो ।।
आतम अनुभूति कर लो,
जिनवर की भक्ति कर लो।। 1 ।।

इन्द्रिय अवलम्बन छोड़ो,
मन का अवलम्बन छोड़ो।
ज्ञेयावलम्बन भी छोड़ो,
उपयोग सु निज में जोड़ो ।।
आतम रस वेदन कर लो,
जिनवर की भक्ति कर लो।। 2 ।।

निज में संतुष्ट रहाओ,
रागादिक विकल्प मिटाओ ।
वैराग्य प्रचुर प्रगटाओ,
दीक्षा ले वन में जाओ।।
मुक्ति का साधन कर लो,
जिनवर की भक्ति कर लो।। 3 ।।

निज में ही थिरता आये,
सब कर्म समूह नशायें।
भव-भ्रमण सहज मिट जाये,
प्रभु सम शिवपद प्रगटाये ।।
आतम-आराधन कर लो,
जिनवर की भक्ति कर लो।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८१ से ८२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’