चेतन है तू | chetana hai tu

चेतन है तू, ध्रुव ज्ञायक है तू।

अनन्त शक्ति का धारक है तू ॥
सिद्धों का लघुनन्दन कहा,
मुक्तिपुरी का नायक है तू ।
चेतन है तू… ॥टेक ॥
चार कषाय, दुःख से भरी, तू इनसे दूर रहे,
पापों में जावे न मन दृष्टि निज में ही रहे।
चलो चलें अब मुक्ति की ओर,
पंचम गति के लायक है तू ॥
चेतन है तू… ॥1 ॥

श्री जिनवर से राह मिली, उस पर सदा चलना,
माँ जिनवाणी शरण सदा, बात हृदय रखना।
मुनिराजों संग केलि करे-2
मुक्ति वधू का नायक है तू ॥
चेतन है तू… ॥2 ॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २६८