जय बोलो पारसस्वामी की जय बोलो त्रिभुवननामी की | Jay Bolo Parasasvami Ki Jay Bolo Tribhuvananami Ki

जय बोलो पारसस्वामी की जय बोलो त्रिभुवननामी की।।टेक।।

महाभाग्य प्रभु दर्शन पाया, परमशान्त जिनरूप सुहाया।
निर्मल तत्त्वज्ञान प्रगटाया, मुक्तिमार्ग प्रत्यक्ष दिखाया।।1।।

भोगों को प्रभु नहीं स्वीकारा, तजा राज्य वैभव दुःखकारा।
बालयति हो दीक्षाधारी, शोभे निर्ग्रन्थ पद अविकारी।।2।।

उपसर्गों मे नहीं चिगाये, निश्चल आतमध्यान लगाए।
निर्मद किया कमठ अज्ञानी, आप हुए प्रभु केवलज्ञानी।।3।।

दिव्यध्वनि अमृत वर्षाया आत्मबोध भव्यों ने पाया।
प्रभु पथ के होवें अनुगामी, अक्षय निजपद पावें स्वामी।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’