तर्ज : चित्स्वरूप प्रगटाया प्रभुवर…
चित्स्वरूप दर्शायो स्वामिन् ! चित्स्वरूप दर्शायो ।
अहो ! अहो !! आनन्द सरोवर, चित्स्वरूप दर्शायो ।। टेक ।।
अद्भुत गुण मंडित परमेश्वर, अन्तर माँहि दिखायो।
मिटी भ्रान्ति पर से निरपेक्ष, सु जाननहार जनायो।। 1।।
सहज शुद्ध परिपूर्ण ज्ञानमय, आतम अनुभव आयो।
करने अरु होने का सब ही, दुर्विकल्प विनशायो।। 2।।
शान्त तृप्त निर्द्वन्द्व हुआ प्रभु, निर्ग्रन्थ भाव जगायो।
होकर साधक लहूँ सिद्धपद, सविनय शीस नवायो।। 3।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ६२
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’