चेतन यह बुधि कौन सयानी, कही सुगुरु हित सीख न मानी | Chetan Yah Budhi Kaun Sayani Kahi Suguru Hit Sikh Na Mani

चेतन यह बुधि कौन सयानी, कही सुगुरु हित सीख न मानी

चेतन यह बुधि कौन सयानी, कही सुगुरु हित सीख न मानी ।।
कठिन काकताली ज्यौं पायौ, नरभव सुकुल श्रवनु जिनवानी ।।चेतन.।।

भूमि न होत चाँदनीकी ज्यौं, त्यौं नहिं धनी ज्ञेयको ज्ञानी ।
वस्तुरूप यौं तू यौं ही शठ, हटकर पकरत सोंज विरानी ।।१।।चेतन. ।।

ज्ञानी होय अज्ञान राग-रुषकर निज सहज स्वच्छता हानी ।
इन्द्रिय जड़ तिन विषय अचेतन, तहां अनिष्ट इष्टता ठानी ।।२।।चेतन. ।।

चाहै सुख, दुख ही अवगाहै, अब सुनि विधि जो है सुखदानी ।
‘दौल’ आपकरि आप आपमैं, ध्याय ल्याय लय समरससानी ।।३।।चेतन. ।।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ११५