जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
तू तो है भगवन् जाननहारा, आँख मेरी वो खोल गई।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
समयसार में द्रव्य दिखाया, आजा तुझे समझा दूँ।
तू शुद्ध - बुद्ध है ज्ञायक प्रभु है आ तुझे आज बता दूँ॥
समयसार में द्रव्य दिखाया, आजा तुझे समझा दूँ।
तू शुद्ध - बुद्ध है ज्ञायक प्रभु है आ तुझे आज बता दूँ॥
ज्ञायक पे दृष्टि करले तू चेतन, जिनवाणी माँ है पुकार रही ।।1।।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
मैंने तो जाना ये चारों ही गतियों में घूमा हूँ और रुला हूँ।
पंचमगति में जाना है मुझको, माँ कहे आज दिला दूँ॥
मैंने तो जाना ये चारों ही गतियों में घूमा हूँ और रुला हूँ।
पंचमगति में जाना है मुझको, माँ कहे आज दिला दूँ॥
पर तुझे अपने में रमना पड़ेगा, बात यही हर बार कही।।2।।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
ज्ञान की ज्योति को तूने जलाया, तूही तो जग में भली है।
अब तक सुना मैंने अनुभव किया नहीं, बस यही बात चली है॥
ज्ञान की ज्योति को तूने जलाया, तूही तो जग में भली है।
अब तक सुना मैंने अनुभव किया नहीं, बस यही बात चली है॥
आतम का बगिया में जाना पड़ेगा, मुक्ति वधु है पुकार रही ।।3।।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
अंतरा 4:
आया है मौका चूक न जाना, निज स्वभाव में आजा।
अपने को जानले अनुभव कर ले तू और उसी में समा जा॥
आया है मौका चूक न जाना, निज स्वभाव में आजा।
अपने को जानले अनुभव कर ले तू और उसी में समा जा॥
सिद्धों की श्रेणी में नाम लिखा है, आनंद की बरसात हुई ।।4।।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥
तू तो है भगवन जाननहारा, आँख मेरी वो खोल गई।
जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई और ये मुझसे बोल गई॥