जय बोलो बाहुबली स्वामी की, जय-जय बोलो | jaya bolo bahubali svami ki jaya jaya bolo

तर्जः जय बोलो पारस स्वामी की …

जय बोलो बाहुबली स्वामी की, जय-जय बोलो।। टेक ।।

प्रतिमा परम दिगम्बर सोहे, निरखत भविजन का मन मोहे ।
अति सौम्य दशा जगनामी की ।। जय बोलो.।। 1।।

ऐसा निश्चल ध्यान लगाया, बेलों ने भी आश्रय पाया।
अति अनुपम है शिव गामी की ।। जय बोलो. ।। 2।।

चक्री ने भी शीस नवाया, क्षपक श्रेणी चढ़ केवल पाया।
धनि मूरति अन्तर्यामी की।। जय बोलो. ।। 3।।

आदीश्वर से पहले ही प्रभु, हुए मुक्त अविकारी हे विभु।
जय-जय हो त्रिभुवन नामी की ।। जय बोलो.।। 4।।

आओ प्रभु को शीस नवाओ, आत्म ध्यान की शिक्षा पाओ।
उत्तम शरणा अभिरामी की ।। जय बोलो. ।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १३८ से १३९
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’