जगदानंदन जिन अभिनंदन, पदअरविंद नमूं मैं तेरे | Jagadanandan Jin Abhinandan Padaravind Namun Main Tere

जगदानंदन जिन अभिनंदन, पदअरविंद नमूं मैं तेरे

जगदानंदन जिन अभिनंदन, पदअरविंद नमूं मैं तेरे ।।टेक।।

अरुणावरन अघताप हरन वर, वितरन कुशल सु शरन बडेरे ।
पद्मासदन मदन मद-भंजन, रंजन मुनिजनमनअलिकेरे ।।१।।

ये गुन सुन मैं शरनै आयो, मोहि मोह दुख देत घनेरे ।
ता मदभानन स्वपर पिछानन, तुम विन आन न कारन हेरे ।।२।।

तुम पदशरण गही जिनतैं ते, जामन-जरा-मरन-निरवेरे ।
तुमतैं विमुख भये शठ तिनको, चहुँ गति विपतमहाविधि पेरे ।।३।।

तुमरे अमित सुगुन ज्ञानादिक, सतत मुदित गनराज उगेरे ।
लहत न मित मैं पतित कहों किम, किन शशकन गिरिराज उखेरे ।।४।।

तुम बिन राग दोष दर्पनज्यों, निज निज भाव फलैं तिनकेरे ।
तुम हो सहज जगत् उपकारी, शिवपथ-सारथवाह भलेरे ।।५।।

तुम दयाल बेहाल बहुत हम, काल-कराल व्याल-चिर-घेरे ।
भाल नाय गुणमाल जपों तुम, हे दयाल, दुखटाल सबेरे ।।६।।

तुम बहु पतित सुपावन कीने, क्यों न हरो भव संकट मेरे ।
भ्रम-उपाधि हर शमसमाधिकर, ‘दौल’ भये तुमरे अब चेरे ।।७।।

पद्मा - लक्ष्मी; उगेरें - गाए, शशकन - खरगोश; सबेरें - सब - समस्त ।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ७६ से ७७

अर्थ

जगत को आनंदित करनेवाले हे अभिनंदन जिनेश्वर! मैं आपके चरण कमल में नमन करता हूँ।

आपका अरुण वर्ण (रंग) पापों को हरनेवाला है। जो आपकी शरण ग्रहण करता है उसे कुशल-क्षेम प्राप्त होती है। आप कामदेव का मद चूर करनेवाले हैं। आप मोक्ष लक्ष्मी के मन्दिर हैं। ये आपके चरण कमल मुनिजनों के मनरूपी भँवरों को मोहित करनेवाले हैं/ आनन्दकारी हैं।

स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पद 54।

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