चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ | Chetan! Tum Cheto Bhai, Teen Jagat Ke Nath

चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ

चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ,
ऐसो नरभव पायकैं, काहे विषया लवलाई॥चेतन. ॥१॥

नाहीं तुमरी लाइकी, जोवन धन देखत जाई।
कीजे शुभ तप त्यागकै, ‘द्यानत’ हूजे अकषाई ॥चेतन. ॥२॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २०

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अर्थ

हे चेतन! अब तो चेतो। तुम तो तीन लोक के नाथ/स्वामी हो। ऐसा मनुष्य जन्म पाकर तुम इन्द्रिय विषयों में रत क्यों हो?

इसमें तुम्हारी योग्यता नहीं है कि तुम यौवन, धन आदि को ही देख रहे हो, उन्हीं में अटक रहे हो। तुम शुभ तप और त्याग करो, द्यानतराय कहते हैं कि ऐसा करने से तुम कषायरहित हो जाओगे।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 100।

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