चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ
चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ,
ऐसो नरभव पायकैं, काहे विषया लवलाई॥चेतन. ॥१॥
नाहीं तुमरी लाइकी, जोवन धन देखत जाई।
कीजे शुभ तप त्यागकै, ‘द्यानत’ हूजे अकषाई ॥चेतन. ॥२॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २०
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