चेतो चेतोरे चेतनवा
चेतो चेतोरे चेतनवा, मानुष जनम रतन मत खोय ।
जनम रतन मत खोय, मग में कांटे शूल न बोय ॥टेक॥
मत ना रागी देव मनावे, मत मिथ्या बाणी मन लावे ।
विष अमृत ना होय - २
चेतो चेतोरे चेतनवा, मानुष जनम रतन मत खोय ॥१॥
सुन चेतन जिनमत की बाणी, हितकारी शिवपद की दानी ।
पाप करम मल धोय -२
चेतो चेतोरे चेतनवा, मानुष जनम रतन मत खोय ॥२॥
छिन छिनमें आयु घट जावे, वक्त गया फिर हाथ न आवे ।
जाग पड़ा मत सोय - २
चेतो चेतोरे चेतनवा, मानुष जनम रतन मत खोय ॥३॥
‘न्यामत’ सुनले सीख सियानी, जो भाषी जिन केवलज्ञानी ।
भव भव में सुख होय - २
चेतो चेतोरे चेतनवा, मानुष जनम रतन मत खोय ॥४॥
Artist: पं. न्यामतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं न्यामतराय कृत भजन)
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