जब हंस तेरे तनका कहीं उड़के जायेगा | Jab Hans Tere Tanka Kahin Udke Jayega

जब हंस तेरे तनका कहीं उड़के जायेगा

जब हंस तेरे तनका कहीं उड़के जायेगा।
अय दिल बता तू किससे नाता रखायगा ॥

यह भाई बन्धु जो तुझे करते हैं आज प्यार ।
जब आन बने कोई नहीं काम आयगा ॥

यह याद रख कि सब हैं तेरे जीते जीके यार ।
आखिर तु अकेला ही मरण दुख उठायगा ॥

सब मिलके जलादेंगे तुझे जाके आगमें ।
एक छिनकी छिनमें तेरा पता भी न पायगा ॥

कर घात आठ कर्मों का निज शत्रु जानकर ।
बे नाश किये इनके तू मुक्ती न पायगा ॥

अवसर यही है जो तुझे करना है आज कर ।
फिर क्या करेगा काल जो मुँह बाके आयगा ॥

अय न्यामत उठ चेत क्यों मिथ्यातमें पड़ा।
जिन धर्म तेरे हाथ यह मुश्किल से आयगा ॥


स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ६० (विभिन्न कवियों के भजन)