जिनवर की जय बोल,मुक्ति मार्ग | Jinvar ki jay bol, muktimarg

(तर्ज- महावीर की जय बोल…)

जिनवर की जय बोल,मुक्ति मार्ग मिले।
घट के पट तू खोल, भावविशुद्धि बढे ।।टेक ।।

मंगल अवसर आया,जिनवर शासन पाया।
तत्त्वारथ को तौल, भेदविज्ञान खिले ।।1।।

देखो प्रभु की मूरत, ऐसी अपनी सूरत।
अन्तर माँहि टटोल, सम्यक् सूर्य खिले ।।2।।

तत्त्वभावना भाओ,निज वैराग्य बढ़ाओ ।
जग प्रपंच को छोड़,गुरू की गोद मिले ।।3।।

निर्ग्रन्थ पथ अपनाओ, ध्रुव शुद्धात्म ध्याओ।
परिणति होय अडोल, कर्म कलंक टले ।।4।।

आतम निधि प्रगटावे, परमातम कहलावे ।
शिवसुख होय अमोल,अक्षय ज्योति जगे ।।5।।।

Artist - ब्र.श्री रविन्द्र जी आत्मन

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