जिनवर का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग | jinavara ka marga nirgrantha marga

जिनवर का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग।

मुनिवर का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।। टेक ।।

मुक्ति का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग।
ज्ञानी का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।। 1।।

आनन्दमय मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग।
प्रभुता मय मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग।। 2।।

स्वाधीन मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।
अकृत्रिम मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।। 3।।

निरूपाधिक मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग।
निर्द्वन्द्व मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।। 4।।

आदर्श मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग ।
तिहुँ जग में पूज्य निर्ग्रन्थ मार्ग ।। 5।।

पूजूँ सु भाऊँ निर्ग्रन्थ मार्ग।
धनि दिन हो, अपनाऊँ निर्ग्रन्थ मार्ग ।। 6 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८६ से ८७
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’