जय जिनवाणी, जय शुद्धातम,
जय शुद्धातम, जय जिनशासन।। टेक ।।
स्वानुभूतिमय जय जिनशासन ।
नित मंगलमय श्री जिनशासन ।।
अहो अलौकिक श्री जिनशासन।
सहज रूप पावन जिनशासन ।। 1।।
संकटत्राता श्री जिनशासन ।
आनंददाता श्री जिनशासन ।।
रत्नत्रयमय श्री जिनशासन ।
मुक्ति प्रदाता श्री जिनशासन ।। 2 ।।
अरहंतों का शाश्वत शासन ।
निर्ग्रन्थों का ये ही शासन।।
प्राणों से भी प्यारा शासन ।
महाभाग्य पाया जिनशासन।। 3।।
निर्मल भेदविज्ञान करेंगे।
हो निजमय निज रूप लखेंगे ।।
सुखसागर अंतर में पाया।
मग्न रहें पाया जिनशासन।। 4।।
अनन्य शरण अपना शुद्धातम ।
सहज मुक्त शाश्वत परमातम ।।
काल अनंत सुतृप्त रहेंगे।
जयवन्तो जग में जिनशासन ।। 5।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २५८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’