जिनवाणी मोक्ष नसैनी है
जिनवाणी मोक्ष नसैनी है ।।टेक।।
जीव कर्म के जुदा करन को, यह ही पैनी छैनी है ।।1।।
जो जिनवाणी नित अभ्यासै, सो ही सच्चा जैनी है ।।2।।
जो जिनवाणी उर न धरत है, सैनी हो के भी असैनी है ।।3।।
पढो सुनो ध्यावो जिनवाणी, यदि सुख शान्ति लेनी है ।।4।।
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ८९