छोटे-छोटे मुनिवर
छोटे-छोटे मुनिवर, हो गये निहाल ।
कुन्दकुन्द स्वामी का देखो तो कमाल ।।
निज परिणति का, देखो तो कमाल ।टेक ।।
चौबीस आठ गुणों को धरते ।
मन-वच-काय को वश ही करते ।।
येऽऽऽ पंच समिति त्रय गुप्ति पाल ।
स्वामीजी - 2 कुन्दकुन्द स्वामी का देखो तो कमाल ।।
जो हित मित वचन ही उचरते
धर्मामृतरूप वर्षा ही करते ।
हैं-2 ऐसे मुनि के वचन अनमोल ।
छोटे-छोटे मुनिवर… ।टेक ।।
निज पद के आनन्द झुलते ।
निश्चल हो जब निज में रमते ।
हे-2 निज परिणति का देखो तो कमाल ।।
कुन्दकुन्द स्वामी का देखो तो कमाल ।।
कुन्दकुन्द स्वामी निज में विचरते ।
उपशम रस की धार बरसते ।
महामुनि का देखो तो कमाल ।
छोटे-छोटे मुनिवर… ।टेक ।।
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २३०