जिनवाणी सुन लो रे भैया | Jinvani Sun Lo Re Bhaiya

जिनवाणी सुन लो रे भैया, जिनवाणी सुन लो रे ॥

अनन्त भव यूँ ही खोये, पर का बोझा ढोये।
तेरी कथा तुझको सुनावे-2 ॥ जिनवाणी सुन. ॥ (1)

पञ्चपरावर्तन दु:खड़े सुनाकर,
दुर्लभ नरभव का ज्ञान कराकर।
अब ना सुनी तो फिर कौन कहेगा-2॥ जिनवाणी सुन. ॥ (2)

सिद्ध स्वरूपी तू जग में है घूमे,
आनन्द सुखमय प्रभु खुद को हैं भूले।
जिनवाणी से अपना आतम पहचान ले-2॥ जिनवाणी सुन. ॥(3)

चिदान्द ध्रुव का दर्शन कराकर,
वीतरागी सुख का अमृत पिलाकर।
जाग रे क्यों मोह-नींद में सोये-सोये-2॥ जिनवाणी सुन. ॥(4)

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Lyrics , Bhajan के audio के अनुसार :

जिनवाणी सुन लो रे भैया, जिनवाणी सुन लो

शुद्धातम को पाओ रे, निज में रम जाओ

तेरे दर्शन से ओ माता, सम्यक्दर्शन पाता

तेरी सेवा से माता ये, निज का आनन्द आता

हो निज आजा भववासी, कि तेरी इक पल जिंदगी

अनन्त भव यूँ ही खोये, पर में रमने से

सिद्ध स्वरूपी जग में तू है , खुद को भूले हो

तेरी कथा तुझको सुनावे, ये जिनवाणी माता

अब ना सुनी तो कौन कहेगा, जिनवाणी की गाथा

हो निज आजा भववासी, कि तेरी इक पल जिंदगी

आनन्द ध्रुव का दर्शन करके, मोह की नींद से जाग

आतम सुख का पीयूष पीके, छोड़ दे तू राग

मोह की नींद से तुझको जगावे, ये जिनवाणी माता

आतम ध्रुव में रम जाने से, रत्नत्रय को पाता

हो निज आजा भववासी, कि तेरी इक पल जिंदगी

जिनवाणी सुन लो रे भैया, जिनवाणी सुन लो

शुद्धातम को पाओ रे, निज में रम जाओ

तेरे दर्शन से ओ माता, सम्यक्दर्शन पाता

तेरी सेवा से माता ये, निज का आनन्द आता

हो निज आजा भववासी, कि तेरी इक पल जिंदगी

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