चलो रे भाई मोक्षपुरी (कवि राजमल पवैया) | Chalo Re Bhai Mokshapuri (Rajmal Pavaiya)

चलो रे भाई मोक्षपुरी

गाड़ी खड़ी रे खड़ी रे तैयार चलो रे भाई मोक्षपुरी ।।
सम्यक् दर्शन टिकट कटाओ, सम्यक् ज्ञान संवारो ।
सम्यक् चारित की महिमा से आठों धर्म निवारों ।।चलो रे ।।१।।

अगर बीच में अटके तो सर्वार्थसिद्धि जाओगे ।
तैंतीस सागर एक कोटि पूरव वियोग पाओगे ।।चलो रे ।।२।।

फिर नर भव से ही यह गाडी तुमको ले जाएगी ।
मुक्ति वधू से मिलन तुम्हारा निश्चित करवाएगी ।।चलो रे ।।३।।

भव सागर का सेतु लांघकर यह गाडी जाती है ।
जिसने अपना ध्यान लगाया उसको पहुँचाती है ।।चलो रे ।।४।।

यदि चूके तो फिर अनंत भव धर-धर पछताओगे ।
मोक्षपुरी के दर्शन से तुम वंचित रह जाओगे ।।चलो रे ।।५।।


Artist: कवि राजमल जी पवैया
स्रोत: जैन पूजांजलि (श्री रूपचन्द्र सुशीलाबाई दि. जैन ग्रंथमाला, विदिशा, १९९२), प्रारम्भिक भजन