जिनवर भक्ति मंगलकार | Jinavar Bhakti Mamgalakar

तर्ज : कैसे करूँ गुणगान …

जिनवर भक्ति मंगलकार।

जिनवर की परमार्थ भक्ति तो, करती भव से पार।।टेक ।।

देखो जिनवर का आकार, नहीं विकार नहीं श्रृंगार।
नासादृष्टि है सुखकार ।। जिनवर.. ।।1 ।।

प्रभु स्वरूप का करो विचार, दोष अठारह दिए विडार।
प्रगटे सुगुण अपार ।। जिनवर.. । ।2 ।।
अब तो प्रभु के निकट सु-आओ, निर्मल द्रव्यदृष्टि प्रगटाओ।
मोह कलंक निवार ।। जिनवर.. ।।३ ।।

श्री जिनवचन सुनो हितकारी, जगत् प्रपंच तजो दुःखकारी।
जिनमारग अवधार।। जिनवर.. ।।4 ।।

प्रभु समान निज आतम ध्याओ, निज परमातम पद प्रगटाओ।
आवागमन निवार।। जिनवर.. ।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’