तर्जः कर लो जिनवर का…
जय-जय महावीर भगवान्, दर्शन कर आनन्द भया।। टेक ।।
महाभाग्य देखे अहो ! वीतराग जिनराज ।
मोह-महातम मिट गयो, जन्म सफल भयो आज ।। 1।।
साक्षात् अमृत झरे, मूरति से सर्वंग।
नाशे जन्म-जरा-मरण, राचे निज रस रंग।। 2।।
बिन बोले ही बोलते, मुक्तिमार्ग दर्शाय ।
मुक्त स्वरूपी आत्मा, प्रत्यक्ष रह्यो दिखाय।। 3।।
जब से देखा आपको, बाहर कुछ न सुहाय।
मिलने योग्य मिला स्वयं, त्याज्य सहज छुट जाय।। 4।।
शासन नायक बालयति, हे अन्तिम तीर्थेश ।
चरणों में प्रणमूँ प्रभो, तृप्त हुए सर्वेश।। 5।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ११७ से ११८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’