ट-वर्ग, त-वर्ग (ण त थ द ध न)
कुल 324 भजन
ण (3)
त (68)
- तत्त्व सार भाषा
- तन देख्या अथिर घिनावना
- तन-मन सारो जी सांवरिया
- तप कल्याणक भक्ति जैन भजन
- तहां लै चल री! जहां जादौपति प्यारो
- तिहारे ध्यान की मूरत
- तीन टिकट; शिवपुर के तीन टिकट
- तीन भुवन के नाथ पधारे
- तीन भुवन के स्वामी
- तीन भुवन में सार है, महिमा अपरम्पार है
- तीन लोक के स्वामी, सहज सुख रूप हो
- तीन लोक चूड़ामणि हूँ
- तीर्थ आना सफल तेरा तब होयेगा, तीर्थ परिणति में तेरे प्रगट होयेगा
- तीर्थं वंदना करें भव्यजन, चलो परम आनन्दमय
- तीर्थंकर नाथ पधार्या जी
- तीर्थराज पहिचान हमारी, तीर्थराज है शान हमारी
- तीर्थराज है हृदय हमारा, तीर्थराज प्राणों से प्यारा
- तुझे प्रभु वीर कहते हैं
- तुझे बेटा कहूँ कि वीरा
- तुम गुणमणि निधि हौ अरहन्त
- तुम जैसा मैं भी बन जाऊँ
- तुम ज्ञायक चेतन हो
- तुम तो प्रभु वीतरागी- कब हमें बनाओगे
- तुम देखे दरश सुख
- तुम मान अनिष्ट न क्रोध करो, परिणमन वस्तु का सहजहिं हो
- तुम सुनियो श्रीजिननाथ, अरज इक मेरी जी
- तुम सुनियो साधो! मनुवा मेरा ज्ञानी
- तुमसे लगनी लागी मुनिवर, तुमसे लगनी लागी
- तुमसे लागी लगन
- तुम्हारी मूरत पर हमने देखा
- तुम्हारी मूरत पे
- तुम्हारे दर्श बिन स्वामी
- तुम्हारे दर्शन से भगवान
- तुम्हीं हो ज्ञाता, द्रष्टा तुम्हीं हो
- तुम्हें धरा पर
- तू काहेको करत रति तनमें, यह अहितमूल जिम कारासदन
- तू कितनी मनहर है..जिनवाणी भक्ति
- तू चिंतन के क्षण में
- तू जाग रे चेतन देव तुझे जिनदेव
- तू जाग रे चेतन प्राणी
- तू ज्ञान का सागर है
- तू तो समझ समझ रे!
- तू धर ले दिगम्बर चोला
- तू स्वरूप जाने बिना दुखी
- तू ही चेतन चिदानन्द चिद्रूप है
- तू ही शुद्ध है
- तेरा ध्यान जब से किया है
- तेरा सुख तुझ में ही
- तेरी छत्र छाया भगवन
- तेरी पूजा ओ मेरे ईश
- तेरी वाणी अंतर में
- तेरी शांत छवि
- तेरी शीतल शीतल मूरत
- तेरी साक्षी में अहो जिनराज
- तेरी सुंदर मूरत
- तेरे अंतर में भगवान् है
- तेरे ज्ञानावरन दा परदा
- तेरे दर्शन को मन दौड़ा
- तेरे दर्शन से मेरा दिल खिल गया
- तेरे पाँच हुए कल्याणक प्रभो
- तो से लाग्यो नेह रे (कवि राजमल पवैया)
- तो ही समझायो सौ सौ बार
- तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा
- तोड़ विषियों से मन जोड़
- तोडिबे मोह रूप जंजाल, सिद्ध गुण सुमिरण करिलै रे
- तोड़ो जग से नाते
- तोरी पल पल निरखें
- त्यागो लोभ महा दुखकार, पाओ लाभ महा अविकार
थ (5)
- थांकी उत्तम क्षमा पै जी
- थांकी कथनी म्हानै
- थांकी तो वानी में हो
- थारा तो वैना में सरधान घणो छै, म्हारे छवि निरखत हिय सरसावै
- थे तो जिनवाणी के मारग
द (70)
- दया कर-दया कर दया धर्म, हम आए हुए हैं शरण में तिहारी
- दया निधि वीतरागी देव, तेरी शरण आये हैं
- दरबार तुम्हारा मनहर है
- दरबार सजा चेतन राजा का
- दरश करत मन मोहे मूरतियाँ
- दर्श जिनराज का पाया, सहज आनंद विलसाया
- दर्श जिनराज का पाया, सहज आनंद विलसाया (दर्श जिनराज का पाया,)
- दर्शकर जिनराज के आनंद अपरम्पार हो
- दर्शन नेमिनाथ का सबको, परमानन्द प्रदाता है
- दर्शन पायो आनन्द छायो, सम्यक् भेदज्ञान प्रगटायो
- दर्शन स्तुति
- दशलक्षण के दश धर्मों का
- दशलक्षण महा सुखकार
- दिन आयो-दिन आयो-दिन आयो
- दिन-रात स्वामी
- दिया जले अगम का
- दिवस आज का मंगलकारी, धर्म ध्वजा फहराएँ
- दिव्यध्वनि वीरा खिराई आज
- दीठा भागनतैं जिनपाला, मोहनाशनेवाला
- दीनपनो तज प्रभु भजो, पाओ सुख अपार
- दीपक सम्यक् ज्ञान उजारो
- दुनियाँ मतलब की गरजी
- दुन्या में देखो
- दुविधा कब जेहे या मन की, कब निजि नाथ निरंजन सुमिरो
- दुविधा कब जैहै या मन की
- दूजा नहीं शुद्धात्म प्रभु सम
- दृष्टि पर से हटा बैठे जो होगा देखा जायेगा
- देख तेरी पर्याय की हालत
- देख दूसरों के वैभव अरु, भोग कभी नहीं ललचाऊँ
- देखने आया चेहरा आपका
- देखने के योग्य जग में
- देखा जब अपने अंतर को
- देखा मैंने त्रिशला का लाल
- देखा मैंने त्रिशला को लाल
- देखा-देखा अनंग रूप जिनवर
- देखी वीर जिनेन्द्र, मूरति ज्ञानमयी
- देखी-देखी अनुपम मूरति
- देखे देखे जगतके देव, राग-रिससौं भरे
- देखे धन्य घरी, आज पावापुर महावीर
- देखे हैं जिनराज कैसे मगन
- देखो ! अन्तर माँहि विराजे आतम देव महान
- देखो अहो देखो, सहज चैतन्य रत्नाकर
- देखो आतम देव महान
- देखो गरब-गहेली री हेली! जादोंपतिकी नारी
- देखो जी आदीश्वर स्वामी
- देखो ज्ञानमयी मुनिराज
- देखो तो दिखाई देता है जहाँ सहज
- देखो देखो प्रभु को देखो
- देखो भाई ! आतम देव विराजै
- देखो भाई! आतमराम विराजै
- देखो भाई ! ज्ञानानन्दमय आतम
- देखो भाई महाविकल संसारी
- देखो मुनिराज निज ध्यान में मगन
- देखो रे मेला, झूठा ये मेला
- देखो सारी नगरिया
- देखो सिद्धचक्र का पाठ, जगत् में मंगलकारी है
- देखो सिद्धचक्र का पाठ, मुक्तिमार्ग दिखाता है
- देखो सुखी सम्यक्वान
- देखो हैं मुनिराज कैसे मगन
- देखो-देखो श्री जिनवर को, देखो-देखो श्री प्रभुवर को
- देख्या बीच जहान में
- देख्यो री! कहीं नेमिकुमार
- देव और मानवों में चर्चा
- देव दर्शन हुए मुझको, सहज आनन्द छाया है
- देव शास्त्र गुरु वंदना
- देवों और मानवों में
- देवों के देव श्री जिनदेव
- दो घड़ी निजनाथ के
- दौड़ा चेतन चार गति
- द्रव्य प्राणों का, होवे वियोग जहाँ
ध (83)
- धन धन जैनी साधु जगत् के
- धन धन साधर्मीजन मिलनकी
- धनि जिनधर्म हमारा है
- धनि जिनधर्म हमारा है, प्राणों से भी प्यारा है
- धनि जिनराज विराजे हैं
- धनि ते प्रानि, जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान
- धनि ते प्रानि, जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान
- धनि ते प्रानि जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान I Dhani Te Prani Jinke
- धनि ते साधु रहत वनमाहीं
- धनि - धनि ते मुनि गिरी वनवासी
- धनि मुनि जिन यह, भाव पिछाना
- धनि मुनि जिनकी लगी लौ
- धनि मुनि निज आतमहित कीना
- धनि मुनिराज हमारे हैं
- धनि मुनिराज हमारे हैं…
- धन्य आपका दर्शन ज्ञान
- धन्य कृतकृत्य हुआ, दर्श करके प्रभो
- धन्य घड़ी मैं दर्शन पाया
- धन्य घड़ी है, धन्य दिवस है, दर्शन पाये जिनवर के
- धन्य जिनवाणी
- धन्य दिन, धन्य घड़ी
- धन्य दिवस धनि घड़ी आज की, आनन्द अपरम्पार है
- धन्य दिवस यह आज का, धन्य घड़ी महाराज
- धन्य धन्य आज घड़ी
- धन्य धन्य आज घड़ी कैसी सुखकार है
- धन्य धन्य आतम स्वभाव तिहूँ जग से न्यारा
- धन्य धन्य जिनराज का दर्शन
- धन्य धन्य जिनरूप अहो
- धन्य धन्य जिनवाणी माता
- धन्य धन्य जिनवाणी माता, ज्ञायक रूप दिखाया है
- धन्य धन्य मन मयूर(आनंद तांडव)
- धन्य- धन्य मुनिवर का जीवन
- धन्य धन्य वीतराग वाणी
- धन्य धन्य है घड़ी आज की
- धन्य प्रभो दर्शन कर मैं निज तत्त्व लखाया
- धन्य मुनिराज की समता
- धन्य मुनिराज हमारे
- धन्य मुनिराज हमारे हैं
- धन्य मुनीश्वर आतम हित में
- धन्य मुनीश्वर निज आतम में मग्न रहें, हाँ मग्न रहें
- धन्य हुआ कृतकृत्य हुआ जब
- धन्य हुआ है जीवन
- धन्य हुए प्रभु दर्शन करके
- धन्य है स्वरूप प्रभु, धनि स्वरूप लीनता
- धन्य हैं मुनि मंगल दातार
- धन्य-धन्य आज समय महा
- धन्य-धन्य कुन्दकुन्द, धन्य-धन्य आत्मा
- धन्य-धन्य जिनरूप अहो
- धन्य-धन्य जिनरूप अहो, धन्य-धन्य प्रभु रूप अहो
- धन्य-धन्य जिनशासन पायो
- धन्य-धन्य निर्ग्रन्थ दशा है, परम धन्य निर्ग्रन्थ स्वरूप
- धन्य-धन्य नेमी जिनेश्वर, धन्य-धन्य शुद्धात्मा
- धन्य-धन्य भयो आज, देखे श्री जिनराज, देखे श्री जिनराज
- धन्य-धन्य मुनिराज रमें, निज में ही, निज में हो
- धन्य-धन्य वीतराग देव अविकार हैं, दर्श सुखकार है-2
- धन्य-धन्य वे ज्ञानी मुनिवर, वर्तें जो समभाव में
- धन्य-धन्य वो क्षण कब आए
- धन्य-धन्य श्री पारस स्वामी, निज स्वरूप दरशायो है
- धन्य-धन्य हे गौतम गुरु
- धर्म दशलक्षण धारो जी
- धर्म बिन कोई नहीं अपना
- धर्म बिना कोई नहीं अपना
- धर्म भावना दशक
- धर्मी होवे पाहुने
- धारा है दिगम्बर वेश
- धिक! धिक! जीवन समकित बिना
- धिक्-धिक् जीवन समकित बिना
- धोली हो गई रे काली कामली
- ध्याऊँ शुद्धातम अविकार-2
- ध्याऊं ध्येय स्वरूप एकाकी वन में, निर्भय वन में, उपवन में
- ध्याओ निज शुद्ध स्वरूप समय है जाता
- ध्यान धर ले प्रभू को
- ध्यानकृपान पानि गहि नासी, त्रेसठ प्रकृति अरी
- ध्यानमय मूर्ति जिनवर की, मुक्ति मारग दिखाती है
- ध्यावो समयसार अविकार, अब उत्तम अवसर आयो
- ध्रुव ज्ञानानन्द स्वभावी मैं, मैं हूँ अनन्त शक्तिधारी
- ध्रुव ध्येय रूप चैतन्य रूप प्रभुवर
- ध्रुव ध्येय रूप निज समयसार ही ध्याऊँ रे
- ध्रुव परमातम सार, ध्याओ-ध्याओ-ध्याओ-ध्याओ, नित सुखकार
- ध्रुव शुद्धात्म ही सार
- ध्रुवधाम की धुन
- ध्वजा मंगलमय फहरावे, ध्वजा मंदिर में लहरावे
- ध्वजारोहण गीत
न (95)
- न मानत यह जिय निपट अनारी, सिख देत सुगुरु हितकारी
- न राग न द्वेष, धरा दिगम्बर वेष
- नंदीश्वर का पाठ, करो त्रय-मास, ठाठ से प्राणी
- नंदीश्वर जिनधाम स्तुति
- नंदीश्वर – नंदीश्वर
- नंदीश्वर में बावन मंदिर, देखत होवे हर्ष महा
- नगन दिगम्बर संत पधारे
- नगरी हो सिद्धों सी
- नग्न दिगम्बर वनवासी को
- नमो देवि वागेश्वरी जैनवाणी
- नमो नमो जिनवाणी माता, शाश्वत् मंगलकारी
- नमों मैं नमों मैं नमों जैनवाणी
- नमों मैं सदा ही श्री जिनवाणी
- नमोकारमंत्र
- नर तन को पाकर के
- नर भव को सफल बनाओ (कवि राजमल पवैया)
- नरभव पाय फेरि दुःख भरना
- नहिं ऐसो जनम बारम्बार
- नहिं गोरो नहिं कारो चेतन, अपनो रूप निहारो
- ना जाने कितना सुख प्रभु को, नयन पलक नहिं मारें
- नाचे रे इन्दर देव रे
- नाथ तुम्हारी पूजा में
- नाथ तुम्हारी भक्ति में सब
- नाथ तुम्हारे दर्शन से
- नाथ तेरी पूजा को मैं आऊँ
- नाथ तेरी महिमा अगम अपार
- नाथ तेरी वीतराग छवि भावे
- नाथ भए ब्रह्मचारी
- नाथ मोहि ऐसी शक्ति हो
- नाथ मोहि तारत क्यों ना? क्या तकसीर हमारी?
- नाद शंख की होवे
- नाम तुम्हारा तारण हारा
- निकली प्रभु की सवारी
- निज आत्मा का ज्ञान अरु निज तत्व
- निज आत्मा में देखो
- निज कारज काहे न सारै रे
- निज के गुण निज में हैं चेतन, तू पर में क्यों भरमाता है
- निज ज्ञायक प्रभु मत भूलो जिया
- निज ज्ञायक ही आनन्दधाम
- निज निधि पाई प्रभु सुखदायी
- निज शुद्धातम को ध्याओ
- निज स्वभाव को जो दर्शावे, मुक्तिमार्ग निर्दोष दिखावे
- निज हित कारज करना
- निजपुर में आज मची रे होरी
- निजातम ध्याऊँगा भवसागर होने
- नित उठ ध्याऊं, गुण गाऊं
- नित जयवंत प्रभु दर्शाती, जिनवाणी जयवंत रहे
- नित जयवन्तं ध्रुव भगवन्तं
- नित जयवन्तो ध्रुव ज्ञायक प्रभु, परम भाव अविकार रे
- नित पीज्यो धी धारी, जिनवाणी सुधा सम जानिके
- नित पीज्यौ धीधारी
- नित सहज पावन, पतित पावन ज्ञानधन आनन्दमय
- नित्य उद्योत रूप शुद्धातम, स्वानुभूति के गम्य रे
- नित्य बोधनी जिनवाणी, तत्त्व बोधनी जिनवाणी
- नित्यबोधिनी माँ जिनवाणी
- निपट अयाना, तैं आपा नहीं जाना, नाहक भरम भुलाना बे
- निरख सखि ऋषिनको ईश यह ऋषभ जिन
- निरखत जिनचंद री माई
- निरखत जिनचन्द्र-वदन
- निरखत जिनचन्द्र-वदन
- निरखत सुख पायौ जिन मुखचन्द
- निरखी निरखी मनहर मूरत
- निरखी-निरखी मनहर मूरति
- निरखो अंग-अंग जिनवर के
- निरपेक्ष त्याग बिन भावविशुद्धि अरे असम्भव रे
- निरपेक्ष रहो, निरपेक्ष रहो, निज से ही निज में तृप्त रहो
- निरुपचार शुद्ध रत्नत्रय ही
- निर्ग्रंथ / निर्ग्रन्थों का मार्ग
- निर्ग्रन्थ गुरुवर कब दर्श पाऊँ, निर्ग्रन्थ पद मैं कब प्रगटाऊँ
- निर्ग्रन्थ जीवन, सहज शांत जीवन
- निर्ग्रन्थ दशा कब पाऊँ
- निर्ग्रन्थ दिगम्बर साधु अलौकिक
- निर्ग्रन्थ पद की भावना भाऊँ
- निर्ग्रन्थ पद हितकार
- निर्ग्रन्थ महामुनिराज, आज मैंने सपने में देखे
- निर्ग्रन्थ मार्ग अपनाया, प्रभु सहजमार्ग अपनाया
- निर्ग्रन्थ मार्ग मोहि लागे प्यारा
- निर्दोष तत्त्व की दृष्टि धरूँ
- निर्भय-स्वभाव चिंतन : मैं सदा से रहा आत्मा अब भी हूँ
- निर्भार रहो निर्भार रहो, बस केवल जाननहार रहो
- निर्मोही को वंदन
- निशा चाँदनी
- निहारो अन्तर में भगवान्, निहारो निज शाश्वत भगवान
- नेमजी हमारे सौरीपुर वारे
- नेमि गये रे गिरनार
- नेमि जिनेश्वर
- नेमि पिया! राजुल पुकारे तोरा नाम
- नेमि बिना न रहै मेरो जियरा
- नेमि मोहि आरति तेरी हो
- नेमिजी तो केवलज्ञानी, ताहीको ध्याऊं
- नेमिनाथ जी की शादी
- नेमिनाथजी की विनती
- नेमिप्रभू की श्यामवरन छवि, नैनन छाय रही
- नेमी कुंवर को देखो ये क्या हो गया
- नैननि को वान परी, दरसन की