दिया जले अगम का | diya jale agm ka

दिया जले अगम का, बिन बाती बिन तेल।।टेक।।

नूर तेरा …२ सब ओर देखा है मैंने ज्ञान से।।१।।
मन क्यों हरषा…२ मेरा नाम है जो शास्त्रों में लिखा।।२।।
रिमझिम वर्षा…२ स्याद्वाद तेरी वाणी में बसा।।३।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०१५), पृष्ठ २३९

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