नंदीश्वर में बावन मंदिर, देखत होवे हर्ष महा | namdishvara mem bavana mamdira dekhata hove harsha maha

नंदीश्वर में बावन मंदिर, देखत होवे हर्ष महा।। टेक।।

रजतगिरी शाल्मलि जम्बू, वक्षार गिरि इष्वाकार।
कुण्डल चैत्य नरोत्तर पर, जो बने जिनालय अकृत्रिम ।। 1 ।।

जम्बू घातकी पुष्करार्द्ध, वसुधा के ढाई क्षेत्रों में।
बहु कृत्रिम जिनभवन बने, इन्द्रादि पूजते हैं जिनको ।। 2 ।।

इन सब पूज्य जिनेन्द्र गृहों में, सुन्दर चैत्य विराजत हैं।
श्वेत श्याम रतनार नील, और पीत वर्ण युत छाजत हैं ।। 3 ।।

जिनकी वीतराग मुद्रा लखते ही पाप विनसते हैं ।।
भव्य जीव जिन-अवलम्बन से, सत् शिव पथ पर चलते हैं ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’