तर्ज : मेरा जूता है जापानी
निकली प्रभु की सवारी, हो गई दुनियाँ मतवारी
रथयात्रा का दिन आया, बोलो मिलकर जय-जयकारी ।। टेक ।।
निकली प्रभु की सवारी …
आगे-आगे इन्द्रध्वजा है, इसकी महिमा भारी- इसकी महिमा भारी,
कैसी सुन्दर सजी सवारी, सब तेरे बलिहारी - सब तेरे बलिहारी ।
सब सजधज कर हैं आयें, गुण तेरे मिलकर गायें ।
रथयात्रा का दिन आया, बोलो मिलकर जय-जयकारी ।। 1 ।।
निकली प्रभु की सवारी …
दर्शन करने परदेशी भी, दूर-दूर से आये - दूर-दूर से आये,
भक्ति तेरी करने को ही, सब मंडल मिल गाये - सब मंडल मिल गाये ।
हैं सब झूम-झूमकर गाये, अब हैं खुशियाँ मनाये,
रथयात्रा का दिन आया, बोलो मिलकर जय-जयकारी ।। 2 ।।
निकली प्रभु की सवारी …
हाथी घोड़े और पालकी, इसकी शान बढ़ाते - इसकी शान बढ़ाते,
नर-नारी सब मिलकर देखो, मंगल गीत सुनाते - मंगल गीत सुनाते ।
सारे मंडल हैं आये, गीत बस तेरे ही गाये,
रथयात्रा का दिन आया, बोलो मिलकर जय-जयकारी ।। 3 ।।
निकली प्रभु की सवारी …
स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन