तोडिबे मोह रूप जंजाल, सिद्ध गुण सुमिरण करिलै रे | todibe moha rupa jamjala siddha guna sumirana karilai re

तर्जः जगाया तुमने…

तोडिबे मोह रूप जंजाल, सिद्ध गुण सुमिरण करिलै रे।

सिद्ध सम निज को भजि लै रे, पाप सब अपने हरि लै रे ।। टेक ।।

सम्यक् दर्शन-ज्ञान वीर्य अरु सूक्ष्मपणा से युक्त।
अगुरुलघु अवगाहन शक्तिमय, सब बाधा से मुक्त ।।
भक्तिभाव से पुरुषारथ से सिद्ध बने हम रे।। 1।।

सिद्ध प्रभु प्रतिबिम्ब हमारा, रूप दिखाने को।
स्वयं सिद्ध आदर्श बने शिवपंथ सुझाने को ।।
उन्हीं के पथ पै चल हैं रे, सिद्ध पद करेंगे रे।। 2।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ७४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’