तो से लाग्यो नेह रे (कवि राजमल पवैया) | To Se Lagyo Neh Re (Rajmal Pavaiya)

तो से लाग्यो नेह रे

तोसे लाग्यो नेह रे त्रिशलानंदन वीर कुमार ।
तोसे लाग्यो नेह रे, कुन्डलपुर के राजकुमार ।।तोसे ।।१।।

गर्भकाल रत्नों की वर्षा, सोलह स्वप्न विचार ।
त्रिशला माता हुई प्रफुल्लित, घर-घर मंगलाचार ।।तोसे ।।२।।

जन्म समय सुरपति सुमेरु पर, करें पुण्य अभिषेक ।
तप कल्याणक लौकान्तिक आ करे हर्ष अतिरेक ।।तोसे ।।३।।

चार घातिया क्षय करते ही पायो केवल ज्ञान ।
समवशरण में खिरी दिव्यध्वनि, हुआ विश्व कल्याण ।।तोसे ।।४।।

पावापुर से कर्मनाश सब पाया पद निर्वाण ।
यही विनय है दे दो स्वामी हमको सम्यक् ज्ञान ।।तोसे ।।५।।

भेदज्ञान की ज्योति जगा दो अंधकार कर क्षार ।
तुम समान मैं भी बन जाऊँ हो जाऊँ भव पार ।।तोसे ।।६।।


Artist: कवि राजमल जी पवैया
स्रोत: जैन पूजांजलि (श्री रूपचन्द्र सुशीलाबाई दि. जैन ग्रंथमाला, विदिशा, १९९२), प्रारम्भिक भजन