भजन:- धन्य जिनवाणी धन्य जिनवाणी
लेखक:- पंडित संजीव जैन
संगीत:- सरस्वती स्टूडियो
संगीत निर्माता:- अरुण विर
स्वर :- पंडित संजीव जैन
सहयोगी स्वर :- शिखा राणा
धन्य जिनवाणी-2
आत्म तत्व का निर्णय कर लो होsss, हो जाओ सम्यग्ज्ञानी।
धन्य जिनवाणी -2
मात्र कर्ण इंद्रिय से सुनना, सुनना नहीं कहाये।
आत्म भावना से सुनना, छल ग्रहण नहीं हो जाये।।
करुणामई वाणी भव्यों को, प्रशम भाव प्रगटाती।
मुमुक्षुओं को अंजलि भर - भर, अमृत पान कराती।।
परमागम का सेवन करके होss, कर हो जाओ अनुभव ज्ञानी।।1।।
धन्य जिनवाणी-2।।
सूत्र सहित सुई नहीं खोवे, वन भवन मांहि गिर जावे।
अहो श्रमण जिनसूत्रों के ज्ञाता भव से तिर जावे।।
स्वाध्याय तप परम कहा, साधक जीवों का गहना।
श्रावक हो या श्रमण सभी ने,इस गहने को पहना ।।
आगम चेठ्ठा तदो ही जेठ्ठा, कहते हैं श्रुतज्ञानी।।2।।
धन्य-जिनवाणी 2
होनहार के ज्ञाता ही, सच्चे पुरुषार्थी होवे।
जो जागृत रहते हैं निज में, वो व्यवहार में सोवे।।
आचार्यों से कम नहीं ज्यादा अरु विपरीत ना जानो।
याथा तथ्यं अनुसारी हो,ज्यों का त्यो श्रद्धानो।।
वैज्ञानिक विज्ञान नगर के, कहते केवलज्ञानी।।3।।
धन्य जिनवाणी-2